पिथौरागढ़, आजखबर। उत्तराखंड में मॉनसून आते ही कई जिलों को गर्मी से राहत मिली है, तो वहीं पहाड़ी इलाकों की मुसीबत भी बढ़ी है। जगह-जगह भूस्खलन से मार्ग बंद होने और नदियों के उफान से लोग सहमे हुए हैं। सीमांत जिला पिथौरागढ़ के कई हिस्सों में लगातार हो रही बारिश के चलते यहां जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। भारी बारिश के चलते 21 ग्रामीण मार्ग बंद चल रहे हैं, जिन्हें खोलने का कार्य जारी है। लगातार हो रही बारिश से नदियां और गाड़-गधेरे उफान पर हैं।
इस वजह से नदियों के किनारे रह रहे लोग खौफ के साये में दिन-रात बिता रहे हैं। पिथौरागढ़ के जिन इलाकों में पुल अभी तक नहीं बन पाए हैं, वहां लोग उफनती नदियों में ट्रॉली के सहारे जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने के लिए मजबूर हैं। यह हालात तब हैं, जब अभी मॉनसून की शुरुआत भर ही है। पिथौरागढ़ जिले में बांसबगड़-कोटा-पंद्रहपाला, कालिका खुमती, देवीसूनी-खेतारकन्याल, बैराज-बोगाड़, बोक्टा-भंडारीगांव रजवार, सैनीखेत-छिलौड़ी और दरकोट-मुनस्यारी जाने वाली प्रमुख सड़कें बंद हैं। भारी बारिश के चलते मुनस्यारी-जौलजीबी नेशनल हाईवे के दरकोट के पास बंद होने से कई वाहन फंसे रहे। हालांकि बीआरओ सड़क खोलने का प्रयास कर रही है। वहीं, वाहन कव्वाधार बर्नियागांव होकर आवाजाही कर रहे हैं। इस बीच पिथौरागढ़ जिले के आपदा प्रबंधन अधिकारी भूपेंद्र सिंह ने कहा कि मलबा आने से बंद पड़े मार्गों को खोलने का काम प्राथमिकता के साथ किया जा रहा है। जल्द ही सभी रास्तों को सुचारू कर दिया जाएगा। इसके अलावा टनकपुर-तवाघाट नेशनल हाईवे में नैनीपातल कूड़ादान, पलेटा, पनखोली, धूसाखान शिवमंदिर सहित कई अन्य स्थानों पर लगातार बोल्डर गिर रहे हैं, जिससे वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा बढ़ गया है। चीन सीमा को जाने वाली मलघाट में बंद तवाघाट-लिपुलेख सड़क को खोल दिया है। इसके बाद पर्यटकों, स्थानीय लोगों और सुरक्षा एजेंसियों ने राहत की सांस ली है।